प्रदेश भर में सरकारी राशन की दुकानों पर दिसंबर माह का वितरण अभी शुरू नहीं हो पाया है। दरअसल, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) की अनुपलब्धता के कारण राइस मिलों से गोदामों तक चावल की आपूर्ति रुक गई है। परिणामस्वरूप लाखों राशन कार्डधारक और सस्ते गल्ले के डीलर वितरण शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

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समय से पहले मिलने वाला राशन अब अटका
आमतौर पर हर महीने का राशन एक सप्ताह पहले डीलरों को दिया जाता है, लेकिन इस बार 23 नवंबर से शुरू होने वाला वितरण दिसंबर मध्य तक स्थगित चल रहा है। राइस मिलों ने धान से चावल तैयार कर लिया है, मगर एफआरके के बिना वितरण की अनुमति नहीं दी जा सकती।
नियमों में बदलाव बना देरी का कारण
नई नीति के अनुसार अब एफआरके की खरीद केवल उसके प्रत्यक्ष निर्माता से की जाएगी। साथ ही, इसकी गुणवत्ता निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में कराया जा रहा है। इन तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते आपूर्ति धीमी हो गई है।
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कुछ डीलरों को नवंबर का राशन भी नहीं मिला
राज्य के कुछ क्षेत्रों में डीलरों को नवंबर का चावल भी समय पर नहीं मिला। कई डीलर बताते हैं कि गोदामों में स्टॉक खत्म होने से गेहूं और चावल, दोनों की वितरण प्रक्रिया बाधित है। यदि जल्द चावल की आपूर्ति नहीं पहुंचती है, तो जनवरी में दो महीने का राशन एक साथ बांटने की तैयारी की जा सकती है।
एफआरके क्या है और क्यों है जरूरी
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) एक विशेष प्रकार का पोषित चावल है जिसे सामान्य चावल में मिलाकर पोषण बढ़ाया जाता है। इसमें आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी12 और जिंक जैसे तत्व मिलाए जाते हैं। केंद्र सरकार ने इसे अनिवार्य किया है ताकि बच्चों और महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को कम किया जा सके। प्रति किलो चावल में लगभग 10 ग्राम एफआरके मिलाना आवश्यक है।
मिड डे मील पर भी असर
राशन गोदामों से केवल कार्डधारकों को नहीं, बल्कि स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन कार्यक्रमों को भी आपूर्ति की जाती है। चावल उपलब्ध न होने से अब यह योजना भी प्रभावित हो रही है, जिससे बच्चों को नियमित भोजन मिलने में बाधा आ रही है।
















