कर्मचारियों के लिए EPF यानी Employees’ Provident Fund रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा का आधार होता है। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि अगर सैलरी 15,000 रुपए से ज्यादा हो जाए तो क्या PF कटवाना अनिवार्य रहता है? EPFO ने 2025 में इस पर साफ स्पष्टीकरण जारी किया है, जो हर कर्मचारी के लिए जानना जरूरी है।

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15,000 रुपए तक वालों के लिए PF अनिवार्य
EPFO के नए नियम के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए (Dearness Allowance) मिलाकर 15,000 रुपए या उससे कम है, उनके लिए भविष्य निधि (PF) में योगदान जरूरी है। यह समूह EPF के तहत स्वतः आ जाता है, और हर महीने उनका PF योगदान तय प्रतिशत में कटता है।
15,000 रुपए से ऊपर सैलरी वालों को मिली छूट
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर 15,000 रुपए से ज्यादा है और वह पहली बार नौकरी शुरू कर रहा है, तो उसके लिए PF में शामिल होना अनिवार्य नहीं है। यानी इस श्रेणी में आते कर्मचारी अगर चाहें तो PF खाते से बाहर रह सकते हैं।
पुराने सदस्य रहेंगे PF के दायरे में
अगर कोई व्यक्ति पहले से EPF का सदस्य है, तो उसे नई नौकरी में भी PF से जोड़ा जाएगा — भले ही उसकी सैलरी अब 15,000 रुपए से अधिक हो गई हो। इसका मतलब है कि एक बार PF सदस्य बनने के बाद, यह सदस्यता भविष्य में भी जारी रहती है।
स्वेच्छा से जुड़ने का विकल्प
EPFO ने बताया है कि 15,000 रुपए से ज्यादा सैलरी वाले कर्मचारी चाहें तो स्वेच्छा से PF खाते में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की आपसी सहमति आवश्यक होगी। यह प्रावधान EPF स्कीम के Para 26(6) के तहत आता है।
छह महीने के भीतर जरूरी प्रक्रिया
अगर कर्मचारी स्वैच्छिक रूप से PF से जुड़ना चाहता है, तो उसे यह विकल्प जॉइनिंग के छह महीने के भीतर EPFO कार्यालय में जमा करना होता है। निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन करने पर सदस्यता स्वीकार नहीं की जाएगी।
क्यों फायदेमंद है यह नियम
यह नियम उन लोगों के लिए खास है जो दीर्घकालिक बचत और सुरक्षित रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं। इससे कर्मचारियों को अपनी मर्ज़ी से PF में जुड़ने या बाहर रहने की आज़ादी मिलती है।
















