बिजली विभाग ने नया नियम लागू किया है, जिसमें स्मार्ट मीटर लगाने का पूरा खर्च सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में जोड़ा जाएगा। पहले इसे मुफ्त बताया गया था, लेकिन अब टैरिफ में इजाफा होगा, जिससे हर घर का बिल महंगा हो सकता है। लाखों परिवारों पर यह फैसला भारी पड़ेगा, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां पहले ही बिलों को लेकर शिकायतें हैं।

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स्मार्ट मीटर क्यों लग रहे हैं?
सरकार पूरे देश में पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदल रही है ताकि बिजली की खपत सटीक मापी जा सके और चोरी रुके। ये मीटर डिजिटल होते हैं, जो मोबाइल ऐप से खपत दिखाते हैं और प्रीपेड सुविधा देते हैं। लेकिन इंस्टॉलेशन का खर्च अब बिजली दरों में मिलाया जा रहा है, जिससे फिक्स्ड चार्ज और एनर्जी चार्ज दोनों बढ़ सकते हैं। इससे मासिक बिल में 10-20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।
बिल पर कितना बोझ पड़ेगा?
प्रदेश स्तर पर करोड़ों रुपये का टेंडर हो चुका है, जो उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। एक सामान्य घर पर प्रति मीटर 6 से 9 हजार रुपये तक का अतिरिक्त बोझ आ सकता है, जो कई महीनों में बिल के जरिए चुकाना पड़ेगा। पहले से लगे मीटरों पर दिए गए पैसे भी व्यर्थ हो सकते हैं। छोटे उपभोक्ताओं के लिए यह ज्यादा महंगा साबित होगा, क्योंकि कम यूनिट लेने वालों पर प्रतिशत के हिसाब से असर ज्यादा पड़ेगा।
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उपभोक्ताओं में क्यों फैला आक्रोश?
लोगों को लग रहा है कि यह फैसला बड़े कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाला है। कई जगहों पर मीटर लगते ही बिल दोगुने हो गए, जिससे विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मीटरों का विरोध तेज है, क्योंकि वहां बिजली की खपत कम होती है लेकिन खर्च एक समान जोड़ा जा रहा है। उपभोक्ता संगठन इसे धोखा बता रहे हैं और दरें बढ़ने से पहले रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
क्या हैं स्मार्ट मीटर के फायदे?
फायदों की बात करें तो ये मीटर अनुमानित बिलिंग खत्म करते हैं और रीयल-टाइम डेटा देते हैं। प्रीपेड मोड में बिजली खत्म होने पर ऑटो कट जाता है, जो बकाया रोकता है। खपत पैटर्न देखकर बचत भी की जा सकती है, जैसे रात में कम इस्तेमाल। लेकिन शुरुआती खर्च के बिना ये सुविधाएं अधर में लटक रही हैं।
उपभोक्ता क्या करें बचाव के लिए?
बढ़े बिल पर तुरंत शिकायत करें, ऐप या हेल्पलाइन से रीडिंग वेरिफाई करें। मीटर चेक के लिए अलग से जांच मीटर लगवाने की मांग करें। समय पर भुगतान करें ताकि रीकनेक्शन चार्ज न लगे। भविष्य में दरें तय होने से पहले स्थानीय प्रतिनिधियों से बात करें। जागरूक रहें और खपत कम करने की कोशिश करें।
















