बैंकों ने 2025 में सेविंग्स अकाउंट के मिनिमम बैलेंस नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। ये बदलाव ग्राहकों को ज्यादा लचीलापन देते हैं, खासकर डिजिटल बैंकिंग के दौर में। लाखों खाताधारकों को अब जुर्माने की चिंता कम होगी।

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SBI के नए दिशानिर्देश
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने ब्रांच के प्रकार के आधार पर औसत मासिक बैलेंस की सीमा निर्धारित की है। महानगरों और शहरी क्षेत्रों में 3,000 रुपये, शहरी इलाकों में 2,000 रुपये, अर्ध-शहरी में 1,000 रुपये तथा ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 500 रुपये रखना जरूरी होता है। अगर बैलेंस कम रहता है, तो प्रतिशत के आधार पर मामूली शुल्क लग सकता है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों को इससे छूट मिलती है। ये नियम ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान करने की सुविधा देते हैं।
PNB की राहत भरी नीति
पंजाब नेशनल बैंक ने जुलाई 2025 से सभी सेविंग्स अकाउंट्स पर मिनिमम बैलेंस न बनाए रखने की पेनल्टी पूरी तरह हटा दी है। पहले शहरी ब्रांचों में 5,000 रुपये का औसत बैलेंस जरूरी था, लेकिन अब कोई दबाव नहीं। महिलाओं, किसानों और कम आय वाले परिवारों को इससे विशेष लाभ मिलेगा, क्योंकि बैंकिंग अब बिना तनाव के सुलभ हो गई है। यह कदम वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है।
HDFC बैंक की अपडेटेड लिमिट
एचडीएफसी बैंक ने नए खातों के लिए महानगरों और शहरी ब्रांचों में औसत मासिक बैलेंस को 25,000 रुपये तक बढ़ा दिया है, जो अगस्त 2025 से प्रभावी है। पुराने ग्राहकों पर कोई बदलाव नहीं, लेकिन नए अकाउंट होल्डर्स को सावधानी बरतनी होगी। शॉर्टफॉल पर 6 प्रतिशत तक शुल्क या अधिकतम 600 रुपये कटौती हो सकती है। हालांकि, 1 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट रखने से यह छूट मिल जाती है।
बदलावों से कैसे फायदा उठाएं?
अब बैंक ऐप्स और एसएमएस अलर्ट से बैलेंस की निगरानी आसान हो गई है। जीरो बैलेंस वाले बेसिक या जन धन अकाउंट चुनें, जहां कोई न्यूनतम राशि जरूरी नहीं। ब्रांच लोकेशन और खाता प्रकार चेक करके सही प्लान बनाएं। डेली बैलेंस कैलकुलेशन से ब्याज भी ज्यादा पारदर्शी मिलेगा।
ग्राहकों के लिए सलाह
इन नियमों का पालन करके अनावश्यक शुल्क से बचें। बैंक वेबसाइट या ब्रांच से व्यक्तिगत जानकारी लें, क्योंकि प्रोफाइल के आधार पर छूटें अलग-अलग होती हैं। 2025 में बैंकिंग ज्यादा ग्राहक-केंद्रित हो रही है, जो सभी के लिए फायदेमंद साबित होगी।
















