श्री माता वैष्णो देवी की पावन यात्रा अब और भी सुव्यवस्थित हो गई है। श्राइन बोर्ड ने चढ़ाई और वापसी के लिए सख्त समय सीमा तय कर दी है, ताकि भक्तों को भगदड़ या जाम जैसी परेशानियों से निजात मिले। ये नियम सभी यात्रियों पर लागू होंगे, चाहे वे पैदल जाएं या हेलीकॉप्टर का सहारा लें।

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समय सीमा के नए नियम
रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाले RFID कार्ड की वैधता अब सीमित है। कार्ड लेने के ठीक 10 घंटे के अंदर यात्रा आरंभ करनी होगी। एक बार चढ़ाई शुरू होने के बाद 24 घंटे में कटड़ा बेस कैंप पर वापस पहुंचना जरूरी है। इससे भवन परिसर में अनावश्यक ठहराव रुकेगा और रास्ता हमेशा खुला रहेगा। ये व्यवस्था बैटरी कार या अन्य साधनों से जाने वालों के लिए भी बाध्यकारी है।
बदलाव का मुख्य कारण
नए साल के दौरान यात्रा पर लाखों श्रद्धालु उमड़ आते हैं, जिससे भवन के आसपास और रेस्ट हाउसों में भारी भीड़ लग जाती। पहले रजिस्ट्रेशन के बाद यात्रा कहीं भी शुरू हो सकती थी, लेकिन वापसी में कोई तय समय नहीं था। नतीजा? रास्तों पर रातें गुजारना, सोना और जाम, जो कभी-कभी दुर्घटनाओं को न्योता देता। श्राइन बोर्ड ने इसे देखते हुए ये कदम उठाया है, ताकि हर भक्त सुरक्षित और शीघ्र दर्शन कर सके।
भक्तों को मिलने वाले लाभ
ये नियम यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएंगे। अब दर्शन के बाद तुरंत वापसी होगी, जिससे थकान कम होगी और अगले भक्तों को जगह मिलेगी। रात्रि में भी तरकोटे मार्ग पर रजिस्ट्रेशन केंद्र 24 घंटे खुले रहेंगे, जो देर रात पहुंचने वालों के लिए वरदान साबित होगा। कुल मिलाकर, यात्रा का आनंद दोगुना हो जाएगा बिना किसी झंझट के।
यात्रा के लिए जरूरी टिप्स
यात्रा की योजना बनाते समय RFID कार्ड को प्राथमिकता दें और समय का सख्ती से पालन करें। सुबह जल्दी निकलें ताकि भीड़ से बचा जा सके। मौसम के हिसाब से कपड़े और पानी साथ रखें। हेलीकॉप्टर बुकिंग के लिए आधिकारिक ऐप का इस्तेमाल करें। जय माता दी के जयकारों के साथ यात्रा पूरी करें!
















