सीबीएसई ने 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 2026 से नया सिस्टम लागू किया है, जो छात्रों को दो मौके देगा लेकिन सख्त नियमों के साथ। ये बदलाव छात्रों को बेहतर तैयारी और सटीकता सिखाने के उद्देश्य से हैं। खासकर साइंस और सोशल साइंस जैसे विषयों में छोटी गलतियां महंगी साबित होंगी।

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दो मौकों वाला नया परीक्षा पैटर्न
अब 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित होगी। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में अनिवार्य रहेगी, जबकि दूसरी मई-जून में वैकल्पिक सुधार परीक्षा होगी। छात्रों को दोनों में से बेहतर प्रदर्शन ही अंतिम मार्कशीट में दर्ज होगा। इससे एक परीक्षा का दबाव कम होगा, लेकिन पहली परीक्षा में कम से कम तीन विषयों में भाग लेना जरूरी है। ये व्यवस्था छात्रों को कमजोर विषयों को सुधारने का अवसर प्रदान करेगी।
साइंस पेपर में सख्त सेक्शन नियम
साइंस परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सेक्शन अलग-अलग होंगे। अगर कोई छात्र गलत सेक्शन में उत्तर लिखेगा, तो वो उत्तर जांचा ही नहीं जाएगा। चाहे उत्तर कितना भी सही हो, जीरो नंबर मिलेंगे। ये नियम उत्तर पुस्तिका को व्यवस्थित रखने और मूल्यांकन को आसान बनाने के लिए हैं। छात्रों को प्रश्न पत्र की संरचना को ध्यान से पढ़ना होगा।
सोशल साइंस में भी जीरो टॉलरेंस
सोशल साइंस में हिस्ट्री, ज्योग्राफी, पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स के लिए अलग हेडिंग्स होंगे। गलत हेडिंग के नीचे सही उत्तर लिखने पर भी कोई अंक नहीं मिलेंगे। रीचेकिंग या वेरिफिकेशन में भी ये सुधार नहीं होगा। ये बदलाव छात्रों को उत्तर लिखते समय सावधानी बरतने की सीख देंगे।
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अन्य नए नियम और अटेंडेंस जरूरी
स्कूल में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी, बिना इसके परीक्षा में बैठना संभव नहीं। इंटरनल असेसमेंट भी बोर्ड परीक्षा का हिस्सा बनेगा। प्रश्न पत्र में 50 प्रतिशत कॉम्पिटेंसी बेस्ड प्रश्न, 20 प्रतिशत एमसीक्यू और बाकी शॉर्ट-लॉन्ग आंसर टाइप होंगे। विषय चयन की LOC सितंबर तक भरनी पड़ेगी, बाद में बदलाव सीमित होंगे।
तैयारी के लिए टिप्स
छात्रों को प्री-बोर्ड परीक्षाओं से ही नए पैटर्न की प्रैक्टिस शुरू कर देनी चाहिए। सेक्शन-वाइज उत्तर लिखने की आदत डालें और समय प्रबंधन पर फोकस करें। सिलेबस को गहराई से समझें, रटने से बचें। मॉक टेस्ट लें और कमजोरियां सुधारें। अभिभावक भी बच्चों को नियमित पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें।
भविष्य की राह आसान बनाने वाले बदलाव
ये सुधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरित हैं, जो स्किल्स और समझ पर जोर देते हैं। छात्रों को सतर्क रहकर अच्छे अंक लाने का मौका मिलेगा। सही तैयारी से 2026 की परीक्षा सफल होगी।
















