2025 में गैस सिलेंडर की कीमतों ने आम आदमी और व्यापारियों दोनों को अलग-अलग संदेश दिए। जहां घरेलू रसोई गैस पर साल भर बोझ बना रहा, वहीं व्यावसायिक सिलेंडरों ने लगातार राहत दी। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल के साथ-साथ घरेलू नीतियों का नतीजा है।

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साल 2025 का उतार-चढ़ाव
इस साल की शुरुआत में व्यावसायिक 19 किलो सिलेंडर की कीमतें ऊंची रहीं, लेकिन अप्रैल से दिसंबर तक कुल 238 रुपये की कमी दर्ज की गई। अप्रैल में पहली बड़ी कटौती हुई, उसके बाद जुलाई में और कमी आई। सितंबर और नवंबर में भी छोटे-मोटे बदलाव हुए, जो होटल, रेस्तरां जैसे कारोबारों के लिए फायदेमंद साबित हुए। दूसरी तरफ, घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर में सिर्फ अप्रैल में 50 रुपये की एक बढ़ोतरी हुई, जो उसके बाद स्थिर रही। इससे परिवारों का खर्च थोड़ा बढ़ा, लेकिन कोई और उछाल नहीं आया। कुल मिलाकर, व्यावसायिक क्षेत्र को ज्यादा फायदा मिला।
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शहरों में मौजूदा दरें
दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 853 रुपये पर टिका है, जबकि व्यावसायिक वाला 1580.50 रुपये हो गया। मुंबई में घरेलू 852.50 और व्यावसायिक 1531.50 रुपये पर उपलब्ध है। कोलकाता का घरेलू 879 रुपये और व्यावसायिक 1684 रुपये, वहीं चेन्नई में 868.50 तथा 1739.50 रुपये हैं। ये दरें मासिक समीक्षा पर निर्भर करती हैं, जो बाजार की हवा के अनुसार बदलती रहती हैं। ग्रामीण इलाकों में सब्सिडी योजनाओं से गरीब परिवारों को थोड़ी मदद मिलती है।
2026 की संभावनाएं
नया साल गैस उपभोक्ताओं के लिए सकारात्मक दिख रहा है। अमेरिका से लंबे समय का आयात समझौता सप्लाई को मजबूत करेगा, जिससे कीमतें नीचे आने की पूरी उम्मीद है। वैश्विक तेल बाजार स्थिर होने और घरेलू मांग संतुलित रहने से घरेलू सिलेंडरों पर भी दबाव कम हो सकता है। हालांकि, अगर कच्चे तेल के दाम चढ़े, तो चुनौतियां बनी रहेंगी। सरकार की सब्सिडी योजनाएं जारी रहेंगी, जो लाखों परिवारों को सस्ती गैस उपलब्ध कराएंगी। कुल 500 शब्दों में, 2025 ने सिखाया कि बाजार की चाल अनिश्चित है, लेकिन सतर्क रहकर बचत संभव है।
















