
देहरादून नगर निगम ने पालतू कुत्तों के पंजीकरण को लेकर सख्ती दिखाते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब शहर की सीमाओं में बिना लाइसेंस के कुत्ता पालना न सिर्फ गलत माना जाएगा, बल्कि इसके लिए भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी झेलनी पड़ सकती है। निगम का कहना है कि ये कदम पालतू पशुओं के प्रबंधन, सार्वजनिक सफाई और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
Table of Contents
हर कुत्ता मालिक को कराना होगा जरूरी रजिस्ट्रेशन
देहरादून नगर निगम के नए आदेशों के अनुसार, शहर की सीमा में रहने वाले सभी कुत्ता मालिकों के लिए अपने पालतू कुत्ते का पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य है। इसके लिए मालिकों को निगम के Official Portal पर जाकर आवेदन भरना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
निगम अधिकारियों का कहना है कि इस रजिस्ट्रेशन से यह जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी कि कौन-सा कुत्ता किस इलाके में रहता है, और उसका मालिक कौन है। इससे आवारा जानवरों के मामलों पर कंट्रोल रखने में भी मदद मिलेगी।
बिना लाइसेंस पर लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना
अगर कोई मालिक अपने पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता है और वह बिना लाइसेंस के पाया जाता है, तो नगर निगम ₹5,000 तक का जुर्माना लगा सकता है। यही नहीं, बार-बार नियम तोड़ने वाले मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कुत्ते को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया जा सकता है।
निगम के एक अधिकारी के अनुसार, अब तक कई मामलों में बिना लाइसेंस वाले कुत्ते सार्वजनिक स्थानों पर पाए गए हैं, जिससे लोगों को परेशानी हुई। ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।
एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र अनिवार्य
कुत्ते का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पालतू पशु का एंटी-रेबीज टीकाकरण (Anti-Rabies Vaccination) जरूरी है। आवेदन के समय मालिक को पशु चिकित्सक द्वारा जारी वैक्सीन सर्टिफिकेट देना होगा। यह सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि कुत्ता सुरक्षित है और किसी तरह की बीमारी का खतरा दूसरों के लिए नहीं बनेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पब्लिक हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है। रेबीज जैसी बीमारी से अक्सर अनजान लोग प्रभावित हो जाते हैं, और नियमित वैक्सीनेशन से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लाइसेंस का सालाना नवीनीकरण भी जरूरी
देहरादून नगर निगम द्वारा जारी पालतू कुत्ते का लाइसेंस केवल एक वित्तीय वर्ष के लिए वैध रहेगा। हर साल 1 अप्रैल से 31 मई के बीच इसका Renewal कराना जरूरी होगा। यदि मालिक समय पर नवीनीकरण नहीं कराते हैं, तो लाइसेंस स्वतः रद्द हो सकता है और फिर से नया आवेदन करना पड़ेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य शहर में पालतू कुत्तों के रिकॉर्ड को नियमित और अपडेटेड रखना है, ताकि किसी भी स्थिति में प्रशासन के पास सही डेटा मौजूद रहे।
सार्वजनिक स्थानों पर ध्यान रखें ये जरूरी नियम
सिर्फ लाइसेंस लेना ही नहीं, बल्कि कुत्ते को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने के नियम भी अब तय कर दिए गए हैं। जब भी कोई मालिक अपने पालतू को बाहर लेकर जाए, तो उसके गले में नगर निगम द्वारा जारी टोकन या पट्टा (Leash/Token) होना आवश्यक है। यह पहचान के रूप में काम करेगा और दिखाएगा कि कुत्ता रजिस्टर्ड है।
इसके अलावा, यदि कुत्ते द्वारा कहीं गंदगी फैलाई जाती है, तो उसकी सफाई की जिम्मेदारी मालिक की होगी। ऐसा न करने पर निगम अतिरिक्त जुर्माना भी लगा सकता है। यह नियम पब्लिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
निगम का उद्देश्य
देहरादून नगर निगम का कहना है कि इन नियमों का मकसद किसी पर बोझ डालना नहीं, बल्कि लोगों को जिम्मेदार पालतू मालिक बनाना है। शहर में साफ-सफाई और पशु सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए यह जरूरी कदम है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यह निर्णय सही दिशा में है। इससे पालतू कुत्तों की निगरानी आसान होगी और स्वच्छ, सुरक्षित देहरादून का सपना साकार करने में मदद मिलेगी।
















