बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न रखने से अब ग्राहकों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। कई बैंकों ने सेविंग्स अकाउंट के लिए न्यूनतम बैलेंस की शर्तें अपडेट की हैं, जहां कुछ ने राहत दी तो कुछ ने सख्ती बढ़ाई। ये बदलाव ग्राहकों की जेब पर असर डाल सकते हैं, इसलिए अपनी ब्रांच के नियम जरूर जांचें।

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क्यों जरूरी है न्यूनतम बैलेंस?
सेविंग्स अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस रखना बैंकों के लिए खाते को सक्रिय बनाए रखने का तरीका है। अगर एवरेज मंथली बैलेंस (AMB) कम रहा तो पेनल्टी कट जाती है। मेट्रो शहरों में यह राशि ज्यादा होती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कम। कई बार जीएसटी भी जुड़ जाता है, जो कुल कटौती बढ़ा देता है। ग्राहक अक्सर अनजाने में फंस जाते हैं।
SBI ग्राहकों को मिली बड़ी राहत
SBI ने सभी सेविंग्स अकाउंट पर न्यूनतम बैलेंस की बाध्यता पूरी तरह हटा दी है। अब जीरो बैलेंस पर भी कोई जुर्माना नहीं लगेगा। इससे छोटे खाताधारकों को फायदा हुआ है। अकाउंट पर 2.50% तक ब्याज मिलता रहता है। हालांकि, करंट अकाउंट में अभी भी नियम सख्त हैं।
HDFC के सख्त नियम बरकरार
HDFC बैंक में मेट्रो और अर्बन ब्रांच के लिए 10,000 रुपये का AMB जरूरी है। अगर 85% से कम रहा तो 150 से 600 रुपये तक पेनल्टी लग सकती है। सेमी-अर्बन में 5,000 और रूरल में 2,500 रुपये की सीमा है। यह व्यवस्था ग्राहकों को बैलेंस बनाए रखने के लिए मजबूर करती है।
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PNB ने दी पेनल्टी माफी
PNB ने जुलाई 2025 से सेविंग्स अकाउंट पर न्यूनतम बैलेंस न रखने की पेनल्टी समाप्त कर दी। पहले शॉर्टफॉल के आधार पर चार्ज कटता था, अब जीरो चार्ज। प्रीमियम अकाउंट्स में क्वार्टरली AMB की शर्त हो सकती है। इससे लाखों ग्राहक प्रभावित हुए।
अन्य बैंकों पर नजर
कैनरा बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे पब्लिक बैंक ने भी मिनिमम बैलेंस चार्ज हटाए। प्राइवेट सेक्टर में ICICI और एक्सिस जैसे बैंक अभी पेनल्टी वसूलते हैं। हमेशा बैंक ऐप या ब्रांच से लेटेस्ट लिस्ट चेक करें, क्योंकि नियम बदलते रहते हैं।
| बैंक | मेट्रो AMB | पेनल्टी स्थिति |
|---|---|---|
| SBI | कोई नहीं | जीरो |
| HDFC | ₹10,000 | ₹150-600 |
| PNB | कोई नहीं | जीरो (2025 से) |
| इंडियन बैंक | कोई नहीं | जीरो |
बचाव के आसान उपाय
- मोबाइल ऐप से AMB ट्रैक करें।
- फिक्स्ड डिपॉजिट या RD से बैलेंस बनाए रखें।
- जीरो बैलेंस वाले अकाउंट चुनें।
- मासिक स्टेटमेंट चेक करें।
ये बदलाव ग्राहकों को सतर्क बनाते हैं। समय पर जानकारी से पैसे बचाएं।
















