नए साल से उत्तराखंड की सैर थोड़ी महंगी हो जाएगी। बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियों पर ग्रीन सेस लगेगा, जो पर्यावरण की रक्षा के लिए एक नया कदम है। यह शुल्क 1 जनवरी 2026 से शुरू होगा और आसानी से फास्टैग से कट जाएगा।

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पर्यावरण बचाने की नई पहल
उत्तराखंड सरकार हिमालयी इलाकों को प्रदूषण से बचाने के लिए यह कदम उठा रही है। पहाड़ी सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या से हवा खराब हो रही है, इसलिए इस सेस से मिले पैसे सड़क साफ-सफाई, पेड़ लगाने और ट्रैफिक को सुधारने में लगेंगे। राज्य के 25 साल पूरे होने पर यह योजना तेजी से लागू हो रही है, ताकि पर्यटकों को भी जिम्मेदार बनाया जा सके।
हर गाड़ी पर अलग शुल्क
विभिन्न तरह की गाड़ियों के लिए शुल्क तय किया गया है, जो वाहन के साइज और वजन पर निर्भर करता है। एक दिन में एक बार एंट्री पर ही शुल्क लगेगा, दोबारा आने पर नहीं। बार-बार आने वालों के लिए पास की सुविधा भी है।
| वाहन प्रकार | शुल्क राशि (₹) |
|---|---|
| कार/मैक्सी कैब | 80 |
| डिलीवरी वैन (3 टन तक) | 80 |
| हल्का मालवाहक (3-7.5 टन) | 120 |
| मध्यम मालवाहक (7.5-18.5 टन) | 250 |
| बस (12+ सीटें) | 140 |
| भारी ट्रक (एक्सल अनुसार) | 450-700 |
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किसे नहीं देना पड़ेगा शुल्क
कई गाड़ियों को पूरी छूट मिलेगी, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों। दोपहिया बाइक, इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी या हाइब्रोजन से चलने वाली गाड़ियां फ्री रहेंगी। सरकारी वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, शव वाहन और सेना की गाड़ियां भी मुक्त। उत्तराखंड की अपनी गाड़ियां तो वैसे भी इससे बाहर। ट्रैक्टर जैसे कृषि यंत्रों को भी राहत।
भुगतान कैसे होगा आसान
राज्य की बॉर्डर पर लगे स्मार्ट कैमरे नंबर प्लेट पढ़कर फास्टैग से पैसे काट लेंगे, बिना रुके। NPCI की मदद से यह सिस्टम चलेगा। अगर 20 दिन का शुल्क एक साथ दें तो 3 महीने का पास, 60 दिन का तो साल भर का। इससे सरकार को हर साल अच्छी कमाई होगी, जो विकास में लगेगी। पर्यटक पहले से तैयारी कर लें, ताकि ट्रिप बेझंझ।
















