किसान भाइयों के बीच इन दिनों एक खबर तेजी से फैल रही है कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में सालाना मदद की राशि 6,000 से बढ़ाकर 12,000 रुपये हो सकती है। संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई, जहां विपक्षी सांसदों ने खेती के बढ़ते खर्चों का हवाला देकर मांग उठाई। सरकार ने इस पर स्पष्ट जवाब दिया है, जो लाखों किसानों की उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है।

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संसद में उठा किसानों का मुद्दा
राज्यसभा में एक सांसद ने सीधे सवाल किया कि क्या केंद्र सरकार योजना की वार्षिक सहायता राशि को दोगुना करने की सोच रही है। उन्होंने बताया कि उर्वरक, बीज और मजदूरी के दाम आसमान छू रहे हैं, ऐसे में 6,000 रुपये की मौजूदा मदद अपर्याप्त साबित हो रही है। कृषि मंत्री ने जवाब में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह बयान हाल ही के सत्र में आया, जब किसान संगठनों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।
योजना का मौजूदा स्वरूप
पीएम किसान सम्मान निधि छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लिए शुरू की गई है, जिसमें सालाना तीन बराबर किश्तों में कुल 6,000 रुपये सीधे बैंक खाते में आते हैं। हर किश्त 2,000 रुपये की होती है, जो फसल बोने से पहले आर्थिक सहारा देती है। हाल ही में 21वीं किश्त जारी हो चुकी है, जिसमें करोड़ों किसानों को फायदा पहुंचा। योजना में eKYC और आधार लिंकिंग अनिवार्य कर दी गई है, ताकि फर्जी लाभार्थियों को रोका जा सके। कुछ राज्यों में अब फार्मर आईडी भी जरूरी हो गई है।
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राशि बढ़ोतरी की अटकलों का सच
कई सोशल मीडिया पोस्ट और व्हाट्सएप फॉरवर्ड में दावा किया जा रहा था कि संसदीय समिति की सिफारिश पर राशि दोगुनी हो जाएगी। लेकिन सरकारी बयान से साफ है कि यह महज अफवाह है। मंत्री ने कहा कि बजट और वित्तीय संसाधनों का मूल्यांकन चल रहा है, लेकिन तत्काल कोई बदलाव नहीं। किसान नेता इसे निराशाजनक बता रहे हैं, जबकि सरकार अन्य योजनाओं जैसे फसल बीमा और मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर जोर दे रही है।
किसान आगे क्या करें?
अगर आपका नाम लाभार्थी सूची में नहीं है, तो आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्टेटस जांचें। नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर पंजीकरण करवाएं और दस्तावेज अपडेट रखें। बैंक खाता सक्रिय रखें, क्योंकि किश्तें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से आती हैं। सरकार समय-समय पर योजना में सुधार करती रहती है, इसलिए नियमित अपडेट फॉलो करें। भविष्य में राशि बढ़ोतरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन अभी इंतजार ही बेहतर विकल्प है।
यह योजना देश के करोड़ों किसानों की रीढ़ बनी हुई है। सरकार की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि किसानों की समस्याओं पर नजर बनी हुई है, लेकिन बड़े फैसले सोच-समझकर लिए जाते हैं।
















