राजस्थान सरकार ने समाज में जाति भेद को मिटाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। दूसरी जाति से विवाह करने वाले जोड़ों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी, जो सीधे बैंक खाते में आएगी। यह योजना नई जिंदगी शुरू करने वालों के लिए वरदान साबित हो रही है।

Table of Contents
योजना का मुख्य उद्देश्य
यह प्रोत्साहन योजना सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर केंद्रित है। लंबे समय से चली आ रही जातिगत रूढ़ियों को तोड़ने के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था युवाओं को अपनी पसंद से विवाह करने का हौसला देती है। समाज में एकता बढ़ाने और भेदभाव दूर करने का यह सराहनीय प्रयास है, जो परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत भी बनाता है।
सहायता राशि का बंटवारा
कुल 10 लाख रुपये की रकम दो भागों में मिलती है। पहले 5 लाख रुपये नकद जोड़े के संयुक्त खाते में जमा हो जाते हैं, जिससे दैनिक जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। बाकी 5 लाख रुपये 8 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किए जाते हैं, जो भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और ब्याज के साथ लौटता है। यह व्यवस्था लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है।
कौन ले सकता है लाभ?
पात्रता सरल लेकिन सख्त है। विवाह में एक पक्ष अनुसूचित जाति से और दूसरा सवर्ण या अन्य हिंदू जाति से होना चाहिए। दोनों राजस्थान के मूल निवासी हों, लड़की की उम्र 18 साल से अधिक और लड़के की 21 से अधिक, लेकिन कुल 35 वर्ष से कम। सालाना पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए, और यह पहला विवाह होना चाहिए। कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होना भी जरूरी है। विधवा महिलाओं को पुनर्विवाह पर विशेष छूट मिल सकती है।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
शादी के एक साल के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरें। आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, आय प्रमाण और संयुक्त बैंक विवरण अपलोड करें। आवेदन जमा होने पर सत्यापन होता है, जो एक महीने में पूरा हो जाता है। स्वीकृति मिलते ही राशि खाते में आ जाती है। देर न करें, फायदा उठाने का सही समय यही है!
यह योजना न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि समाज को नई दिशा भी दिखाती है। हजारों जोड़े इससे लाभान्वित हो चुके हैं, और आने वाले समय में इसका असर और गहरा होगा।
















