
सोना हमेशा से लोगों के लिए भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों में सोने की चमक केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रही अब सेंट्रल बैंक भी बड़े पैमाने पर इसमें निवेश कर रहे हैं। वर्ष 2025 की रिपोर्ट बताती है कि सोने की कीमतों में लगभग 48% की बढ़त दर्ज की गई है, और यह अब $3896 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसके पीछे प्रमुख कारण विश्वभर के सेंट्रल बैंकों द्वारा लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ाना है।
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क्यों बढ़ रही है सोने की मांग?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 36359 टन सोना इस समय विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंकों के पास मौजूद है। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि केंद्रीय बैंक डॉलर या अन्य मुद्राओं की अस्थिरता से बचने के लिए सोने पर भरोसा बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की गिरती ताकत के कारण सेंट्रल बैंक सोने को एक “सुरक्षित एसेट” के रूप में देख रहे हैं। यह वही रणनीति है जो उन्हें मुद्रास्फीति और मार्केट रिस्क दोनों से बचाती है।
गोल्ड रिजर्व में कौन है नंबर वन?
अगर बात करें कि कौन-सा देश सबसे ज़्यादा सोने का मालिक है, तो इस सूची में अमेरिका अब भी टॉप पर है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक,
- अमेरिका के पास 8133.5 टन सोना है,
- जर्मनी 3350.3 टन,
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) 2814 टन,
- इटली 2451.8 टन, और
- फ्रांस 2437 टन सोना होल्ड करता है।
ये आंकड़े बताते हैं कि विकसित अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय से अपने गोल्ड रिजर्व को बनाए रखे हुए हैं। उनके लिए सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता की गारंटी है।
भारत की स्थिति और एशियाई देशों का रोल
एशिया के देशों की बात करें तो भारत का प्रदर्शन खासा मजबूत है। भारत इस समय नौवें स्थान पर है और 888 टन सोने के भंडार के साथ अपनी साख बनाए हुए है।
जापान इसके ठीक बाद 846 टन सोने के साथ 10वें स्थान पर है।
विश्लेषक मानते हैं कि भारत का ये कदम उसकी आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक हर साल धीरे-धीरे अपने गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं में देश की मुद्रा को सुरक्षा मिले।
2025 में सेंट्रल बैंकों की सोना खरीदारी
WGC की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ अगस्त 2025 में ही 15 टन नया सोना वैश्विक रिजर्व में जोड़ा गया।
- भारत ने इस साल कुल 3.8 टन सोना खरीदा — जनवरी में 2.8 टन, मार्च में 0.6 टन और जून में 0.4 टन।
- कज़ाकिस्तान के नेशनल बैंक ने अपने भंडार में 8 टन जोड़कर अब इसे 316 टन पर पहुंचा दिया है।
- वहीं, चीन का पीपल्स बैंक भी पीछे नहीं रहा; उसने 2 टन सोना खरीदा, जिससे उसका कुल स्टॉक 2300 टन के पार हो गया है।
- बुल्गारिया का नेशनल बैंक भी इस रेस में शामिल हुआ और अपने रिजर्व को 43 टन कर लिया।
इन आंकड़ों को देखकर साफ समझ आता है कि सोने की खरीदारी अब सिर्फ निवेश का फैसला नहीं रही; यह आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
क्या सोने में निवेश करना सही रहेगा?
सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच आम लोगों के मन में भी यही सवाल उठता है क्या यह निवेश का सही समय है?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोना अल्पावधि में महंगा दिख सकता है, लेकिन दीर्घकाल में इसकी कीमतें स्थिर वृद्धि करती हैं। यह आर्थिक संकट या बाजार गिरावट के समय निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच साबित होता है।
















