मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर देवी प्रसाद शुक्ला ने जो उदाहरण पेश किया है, वह हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। कभी टीवी मैकेनिक के रूप में काम करने वाले देवी प्रसाद आज अपने गांव में खुद की गारमेंट फैक्ट्री चलाकर न सिर्फ खुद की जिंदगी बदल चुके हैं बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल दिया है।

Table of Contents
लॉकडाउन बना नए सफर की शुरुआत
कोविड लॉकडाउन के दौरान जब लाखों लोग शहरों से अपने गांव लौटे, उसी समय देवी प्रसाद ने भी सोच लिया कि वे अब किसी के अधीन नौकरी नहीं करेंगे। ग्रेटर नोएडा की गारमेंट फैक्ट्री में डेढ़ से दो साल काम करने के बाद उन्हें कपड़ा उद्योग की अच्छी समझ हो चुकी थी। इसी अनुभव ने उन्हें खुद का बिजनेस शुरू करने की हिम्मत दी।
तीन सालों में खड़ा किया सफल कारोबार
देवी प्रसाद ने अपने व्यवसाय की शुरुआत महज 1 लाख रुपए से की और धीरे-धीरे 20 लाख रुपए तक का निवेश कर फैक्ट्री को विकसित किया। आज उनकी यूनिट में आधुनिक सिलाई मशीनें लगी हैं, जिनसे कुर्ती-प्लाजो, टी-शर्ट और लोअर जैसे उत्पाद बनते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने लोअर पैंट का अपना खुद का ब्रांड भी लॉन्च किया है और इसका उत्पादन भी यहीं गांव में होता है।
यह भी देखें- गली-गली घूम कर शुरू किया बिजनेस… चार भाइयों ने बना दी 9,769 अरब की कंपनी! देखें
गांव में ही रोजगार के नए अवसर
देवी प्रसाद के इस पहल ने उनके गांव की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। पहले जहां युवाओं को काम की तलाश में शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं आज 10 से ज्यादा स्थानीय लोग उनकी फैक्ट्री में काम कर रहे हैं। इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है बल्कि गांव में आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।
आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
देवी प्रसाद शुक्ला की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसमें ‘स्वरोजगार’ को प्राथमिकता दी गई। अपनी मेहनत, अनुभव और संघर्ष के दम पर उन्होंने दिखा दिया कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।
















