
नए साल 2026 की शुरुआत फिटनेस, खेल और ट्रेनिंग से जुड़े संस्थानों के लिए थोड़ी भारी पड़ने वाली है। जिला विकास एवं खेलकूद प्रोत्साहन समिति ने फैसला लिया है कि अब जिम, स्विमिंग पूल और स्पोर्ट्स अकैडमी का रजिस्ट्रेशन कराना महंगा होगा। पहले जहां यह शुल्क 15 हजार रुपये था, अब इसे बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है।
इस फैसले का असर उन सभी संस्थानों पर होगा जो जिले में फिटनेस या खेल से जुड़ी सुविधाएं चला रहे हैं — जैसे सोसायटी के क्लब, स्कूलों के स्पोर्ट्स विंग, होटल के फिटनेस सेंटर या प्राइवेट जिम और स्विमिंग पूल।
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नियमों के सख्त पालन का उद्देश्य
प्रभारी जिला खेल अधिकारी डॉ. परवेज अली के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और सुरक्षा नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि अकैडमी, जिम और स्विमिंग पूल जैसी जगहों पर NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) और रजिस्ट्रेशन दोनों अनिवार्य हैं। नियमों का पालन न करने वालों पर भविष्य में सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
डॉ. अली ने कहा कि कई बार बिना अनुमति के चल रहे फिटनेस सेंटर्स में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिससे दुर्घटनाओं और विवादों के मामले सामने आते हैं। रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाकर प्रशासन इन संस्थानों को ज्यादा जिम्मेदार बनाना चाहता है।
समिति की बैठक में बना फैसला
यह निर्णय डीएम, एडीएम (वित्त और राजस्व) की अगुवाई में हुई जिला विकास एवं खेलकूद प्रोत्साहन समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अपडेट करने और फॉर्मलिटीज़ को डिजिटल तरीके से लागू करने पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों का मानना है कि फीस बढ़ाने से न सिर्फ रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया मजबूत होगी बल्कि संस्थानों की ऑडिट और निरीक्षण प्रणाली को सुधारा जा सकेगा।
किन-किन को देना होगा बढ़ा शुल्क
इस बदलाव का असर सिर्फ बड़े जिम या स्विमिंग पूल तक सीमित नहीं रहेगा। निवासीय सोसायटियों में बने फिटनेस क्लब, प्राइवेट स्कूलों की अकैडमियां और होटल के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी इसके दायरे में आएंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि हर संस्था जो ऐसी सुविधा चला रही है, वह सही अनुमति के साथ ही कार्य करे ताकि यूजर्स की सेफ्टी और हेल्थ स्टैंडर्ड्स से कोई समझौता न हो।
क्यों जरूरी है यह रजिस्ट्रेशन
रजिस्ट्रेशन और NOC सिर्फ सरकारी फॉर्मेलिटी भर नहीं है। इनसे यह सुनिश्चित किया जाता है कि
- स्विमिंग पूल का पानी समय-समय पर टेस्ट किया जा रहा है या नहीं,
- प्रशिक्षक प्रमाणित हैं या नहीं,
- उपकरण सुरक्षित स्थिति में हैं या नहीं,
- आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था (जैसे लाइफ गार्ड, फर्स्ट एड किट) सही तरीके से मौजूद है या नहीं।
इन सब बातों की जांच के बाद ही अनुमति दी जाती है। कई बार अनरजिस्टर्ड सुविधाओं में हादसे होने के मामले सामने आते हैं, जिनसे बचाव इसी प्रक्रिया से संभव है।
जिम और अकैडमी संचालकों की प्रतिक्रिया
रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाए जाने के फैसले ने जिम और अकैडमी संचालकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया पैदा की है। कुछ लोगों का कहना है कि यह शुल्क काफी ज्यादा है और इससे छोटे स्तर पर काम कर रही अकैडमियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। वहीं, कुछ संचालकों का मानना है कि अगर फीस बढ़ने से सिस्टम पारदर्शी और निष्पक्ष होता है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
फिटनेस इंडस्ट्री पर क्या होगा असर
महंगाई और ऑपरेशनल कॉस्ट पहले ही बढ़ रही है, ऐसे में रजिस्ट्रेशन फीस का बढ़ना एक अतिरिक्त खर्च बन सकता है। संभावना है कि जिम, स्विमिंग पूल और अकैडमियां अब अपनी मेंबरशिप फीस में थोड़ी बढ़ोतरी करेंगी, ताकि यह खर्च यूजर्स से रिकवर किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इससे सुरक्षा और क्वालिटी में सुधार होता है, तो यह लागत वाजिब है।
प्रशासन का संदेश
डॉ. परवेज अली ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी फिटनेस सेंटर या स्विमिंग पूल का उपयोग करने से पहले उसका वैध रजिस्ट्रेशन और NOC जरूर चेक करें। प्रशासन का साफ संदेश है “Fitness and safety go hand in hand.” अगर सभी संस्थान नियमों का पालन करेंगे, तो शहर में सेहतमंद और सुरक्षित फिटनेस कल्चर को बढ़ावा मिल सकेगा।
















