भारत का दिल सभी को खुला रखता है, लेकिन कुछ कोनों में अपने ही लोगों के लिए ताले लटके हैं। सुरक्षा, गोपनीयता या विशेष डील्स के नाम पर देश के छह खास स्थान भारतीय नागरिकों के लिए बंद पड़े हैं। आश्चर्यजनक रूप से इनमें तमिलनाडु की तीन जगहें शामिल हैं, जो इस रहस्य को और गहरा बनाती हैं।

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1. चेन्नई का रेड लॉलीपॉप इन
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में यह होटल विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। यहां पासपोर्ट चेक के बिना कोई भारतीय कदम नहीं रख सकता। मालिकों का तर्क है कि पहली बार भारत घूमने वाले विदेशियों को शांत माहौल चाहिए, जहां स्थानीय भीड़ से बच सकें। इस नीति ने कई विवाद खड़े किए, लेकिन होटल अपनी लाइन पर अड़ा हुआ है।
2. कुडनकुलम का रूसी उपनिवेश
चेन्नई से दूर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में बसा यह इलाका रूस-भारत परमाणु प्रोजेक्ट का हिस्सा है। 19वीं सदी में रूसियों ने बसाया, अब रणनीतिक महत्व से घिरा है। भारतीयों को रूसी दूतावास की विशेष मंजूरी के बिना घुसने की इजाजत नहीं। आसपास के लोग दूर से ही झांकते हैं, क्योंकि सुरक्षा चाक-चौबंद रहती है।
3. ब्रॉडलैंड्स होटल
चेन्नई का एक और लग्जरी स्पॉट, जो पुरानी ब्रिटिश शैली में सजा है। विदेशी पासपोर्ट धारकों को वेलकम, भारतीयों के लिए सख्त जांच। प्रबंधन कहता है कि अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की प्राइवेसी बनाए रखने के लिए ऐसा जरूरी है। लोकल्स के लिए यह ‘नो एंट्री’ का प्रतीक बन चुका है।
4. कसोल का फ्री कसोल कैफे
हिमाचल प्रदेश के कसोल में यह कैफे इजरायली बैकपैकर्स का अड्डा है। भारतीय ग्राहकों को मेनू तक नहीं दिखाया जाता। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बताते हैं कि विदेशी मेहमानों को प्राथमिकता देकर शांत वातावरण बनाया जाता है। मालिकों की यह पॉलिसी स्थानीय युवाओं को नाराज रखती है।
5. गोवा के अरम्बोल बीच
पर्यटन स्वर्ग गोवा के अरम्बोल क्षेत्र में कुछ प्राइवेट बीच शैक्स भारतीयों को दूर रखते हैं। विदेशी पर्यटकों, खासकर बिकिनी पहनने वाली महिलाओं को ‘अवांछित नजरों’ से बचाने का दावा है। शैक्स मालिक बोर्ड लगा देते हैं, जिससे लोकल पर्यटक निराश लौटते हैं।
6. अहमदाबाद का सकुरा रयोकान
गुजरात के अहमदाबाद में यह जापानी रेस्टोरेंट पारंपरिक सेवा पर जोर देता है। प्रवेश द्वार पर साफ बोर्ड भारतीय ग्राहक वर्जित। स्टाफ जापानी भाषा ही बोलता है, हिंदी-अंग्रेजी नहीं। जापानी पर्यटकों को सही अनुभव देने के नाम पर यह नियम चला रहा है।
ये छह स्थान भारत की ‘अतिथि देवो भव’ वाली छवि पर सवाल खड़े करते हैं। संविधान यात्रा की आजादी देता है, लेकिन सुरक्षा, संस्कृति या बिजनेस हित इन दीवारें खड़ी कर देते हैं। क्या ये प्रतिबंध जरूरी हैं या भेदभाव? बहस जारी है, लेकिन ये कोने रहस्यमयी बने रहेंगे।
















