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UP में बनेगा 750 KM का नया एक्सप्रेसवे कॉरिडोर! ₹1500 करोड़ खर्च होंगे, इन 22 जिलों की किस्मत पलटेगी

उत्तर प्रदेश सरकार जल्द शुरू करने जा रही है 750 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर प्रोजेक्ट, जिस पर खर्च होंगे ₹1500 करोड़। यह मेगा प्रोजेक्ट 22 जिलों को जोड़ेगा, जिससे उद्योग, रोजगार और निवेश को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

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उत्तर प्रदेश में एक भव्य सड़क परियोजना ने विकास की नई लहर पैदा कर दी है। पानीपत से गोरखपुर तक फैलने वाला यह 750 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे कॉरिडोर किसानों, व्यापारियों और युवाओं के लिए सुनहरा अवसर लेकर आया है। लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाईवे यात्रा को तेज बनाएगा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।

UP में बनेगा 750 KM का नया एक्सप्रेसवे कॉरिडोर! ₹1500 करोड़ खर्च होंगे, इन 22 जिलों की किस्मत पलटेगी

प्रोजेक्ट की भव्य योजना

यह एक्सप्रेसवे चार से छह लेन वाला होगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली है, और मार्च 2026 तक निर्माण कार्य शुरू होने की पूरी तैयारी है। गजट अधिसूचना अप्रैल में जारी हो सकती है, जिससे दो चरणों में काम तेजी से आगे बढ़ेगा। पहले चरण में पानीपत-शामली से पुवायां तक, फिर गोरखपुर की ओर विस्तार होगा। इससे पूर्वी और पश्चिमी यूपी के बीच दूरी आधी रह जाएगी।

22 जिलों का सुनहरा भविष्य

यह कॉरिडोर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और गोरखपुर जैसे 22 जिलों को जोड़ेगा। इन इलाकों में कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान हो जाएगी, जिससे किसानों को दिल्ली-एनसीआर जैसे बाजारों तक जल्द पहुंच मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में नए गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और छोटे उद्योग फल-फूलेंगे।

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आर्थिक क्रांति के नए द्वार

एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा, जिससे कपड़ा, चावल और अन्य कृषि-आधारित उद्योग मजबूत होंगे। हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर निर्माण, रखरखाव और सर्विस सेक्टर में। स्टार्टअप्स के लिए वेयरहाउसिंग हब उभरेंगे, जबकि ODOP उत्पाद जैसे स्थानीय चावल और हस्तशिल्प राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ जैसे बड़े रूट्स से जुड़ाव से हरियाणा, बिहार तक व्यापार बढ़ेगा।

पूरा होने का समयसीमा और प्रभाव

तीन साल में यह प्रोजेक्ट हकीकत बन सकता है, जिससे गोरखपुर-पानीपत की सात-आठ घंटे की यात्रा महज कुछ घंटों में सिमट जाएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, युवाओं को रोजगार और निवेशकों को अवसर हाथ आएंगे। यूपी का इंफ्रास्ट्रक्चर मानचित्र हमेशा के लिए बदल जाएगा, जो राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 

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