उत्तर प्रदेश में राजस्व लेखपाल की बड़ी भर्ती ने युवाओं में उत्साह जगाया, लेकिन आरक्षण को लेकर उठा विवाद चर्चा का केंद्र बन गया। कुल 7994 पदों पर भर्ती अधिसूचना जारी होते ही अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए कि उनके कोटे में भारी कटौती क्यों हुई। आखिर 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से मिलने वाले 2158 पदों की जगह सिर्फ 1441 क्यों दिखाए गए?

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भर्ती अधिसूचना का खुलासा
16 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन में पदों का बंटवारा कुछ इस तरह था – सामान्य वर्ग को सबसे ज्यादा 4165, OBC को 1441, SC को 1446, ST को 150 और EWS को 792। उम्मीदवारों का गुस्सा इसलिए भड़का क्योंकि OBC कोटा कुल पदों का महज 18 प्रतिशत रह गया। सोशल मीडिया पर अभ्यर्थी इसे आरक्षण नियमों की अनदेखी बता रहे थे। राजनीतिक दल भी मैदान में उतर आए, आरोप लगाते हुए कि पिछड़े वर्ग के हक पर डाका डाला जा रहा है।
गणना में आई खामियां
विवाद की जड़ पदों की गिनती का तरीका है। लेखपाल जैसे पद मंडल स्तर के संवर्ग पर आधारित होते हैं, इसलिए रोस्टर और रिक्तियों की गणना मंडलवार होनी चाहिए थी। जिला स्तर पर भेजे गए आंकड़ों में गड़बड़ी सामने आई, जिससे अधिसूचना में त्रुटि घुस गई। जनपदों से प्राप्त डेटा में विसंगतियां पाई गईं, खासकर OBC और SC कोटे में। विशेषज्ञों का कहना है कि कार्यरत पदों और रिक्तियों की दोबारा जांच जरूरी है ताकि संवैधानिक कोटा बरकरार रहे।
सीएम के हस्तक्षेप से नया मोड़
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक बुलाकर अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि वर्टिकल और हॉरिजॉंटल दोनों आरक्षण का पालन हर हाल में होगा। राजस्व परिषद ने तुरंत एक्शन लेते हुए चयन आयोग को पत्र लिखा। एक सप्ताह के अंदर संशोधित प्रस्ताव मांगा गया, जिसमें श्रेणीवार पदों की नई सूची होगी। आयुक्त ने जोर देकर कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
राजनीतिक रंग और अभ्यर्थियों की चिंता
विपक्ष ने इसे आरक्षण विरोधी नीति का सबूत बताया, जबकि सरकार ने इसे तकनीकी चूक करार दिया। OBC संगठनों ने सीएम को ज्ञापन सौंपा, मांग की कि भर्ती प्रक्रिया रुके। आवेदन 29 दिसंबर से शुरू हो रहे हैं, लेकिन संशोधन का इंतजार है। लाखों युवा आंखें बिछाए हैं कि जल्द राहत मिले।
आगे की राहत की उम्मीद
अब मंडल स्तर पर रोस्टर सत्यापन चल रहा है। संशोधन से OBC कोटा बढ़ सकता है, जिससे अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा। यह मामला भविष्य की भर्तियों के लिए सबक है कि आंकड़ों में लापरवाही न हो। युवाओं को सलाह है कि आधिकारिक अपडेट का इंतजार करें और तैयारी तेज रखें। कुल मिलाकर, विवाद सुलझने से भर्ती पटरी पर लौटेगी।
















