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सिर्फ ₹10 या ₹100 ही नहीं, लाखों के भी होते हैं स्टांप पेपर! जानें किस काम के लिए कितने का पेपर जरूरी और वैल्यू का असली गणित

कहीं ग़लत स्टांप पेपर इस्तेमाल न कर दें! ₹10 से लेकर लाखों तक के पेपरों का असली गणित जानिए, वरना हो सकता है भारी नुकसान या डॉक्यूमेंट भी हो जाए फ़र्ज़ी

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कानूनी कागजात तैयार करते समय स्टांप पेपर की वैल्यू सही चुनना बेहद जरूरी होता है। छोटे-मोटे कामों के लिए कम रकम पर्याप्त लगती है, लेकिन बड़े सौदों में लाखों तक पहुंच जाती है। गलत वैल्यू चुनने से दस्तावेज बेकार हो सकता है।

सिर्फ ₹10 या ₹100 ही नहीं, लाखों के भी होते हैं स्टांप पेपर! जानें किस काम के लिए कितने का पेपर जरूरी और वैल्यू का असली गणित

स्टांप पेपर क्यों और कैसे काम करता है

स्टांप पेपर सरकार को दिए गए टैक्स का प्रमाण है, जो किसी एग्रीमेंट को अदालत में वैध बनाता है। यह मुख्य रूप से दो तरह के आते हैं: एक कोर्ट संबंधी कामों के लिए और दूसरा सामान्य समझौतों के लिए। वैल्यू दस्तावेज की अहमियत, लेनदेन की राशि और जगह के नियमों से तय होती है। छोटे फॉर्म भरने से लेकर करोड़ों के प्रॉपर्टी डील तक हर स्तर पर इसका इस्तेमाल होता है।

छोटे कामों के लिए कम वैल्यू

रोजमर्रा के कई काम आसानी से निपट जाते हैं कम रकम वाले स्टांप पेपर से।

  • ₹5 से ₹10 वाले पेपर सामान्य घोषणाओं या छोटे हलफनामों के लिए बिल्कुल सही रहते हैं।
  • ₹50 का पेपर नोटिस या बेसिक शपथ पत्र बनाने में काम आता है।
  • ₹100 सबसे ज्यादा चलन वाला है, जैसे 11 महीने का किराया समझौता, सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी या छोटा लोन एग्रीमेंट।
  • ₹500 तक के पेपर मध्यम स्तर के अनुबंधों, जैसे थोड़े लंबे किराए या पार्टनरशिप के शुरुआती समझौतों में लगते हैं।

इनका फायदा यह है कि ये सस्ते और हर जगह आसानी से मिल जाते हैं।

बड़े सौदों में लाखों की स्टांप वैल्यू

जब बात करोड़ों के लेनदेन की आती है, तो स्टांप पेपर की कीमत भी आसमान छूने लगती है। प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री या लंबी लीज में यह लेनदेन रकम का एक निश्चित हिस्सा बन जाती है। साझेदारी फर्म शुरू करने पर पूंजी के आधार पर हजारों रुपये लग सकते हैं। बड़े एग्रीमेंट में कम वैल्यू इस्तेमाल करने से जुर्माना या दस्तावेज रद्द होने का खतरा रहता है।

राज्य अनुसार वैल्यू का फर्क

हर राज्य में नियम थोड़े अलग हैं, इसलिए लोकल चेक करना पड़ता है।

राज्यसामान्य प्रॉपर्टी डील पर वैल्यू (लगभग)
महाराष्ट्र5-6% तक, महिलाओं को छूट मिलती है
उत्तर प्रदेश7% के आसपास
दिल्ली4-6%
कर्नाटक2-5% स्लैब के हिसाब से

कुल रकम निकालने का तरीका सरल है: डील वैल्यू में दर लगाकर, प्लस थोड़ी अतिरिक्त फीस जोड़ें।

सही वैल्यू कैसे चुनें

दस्तावेज की रकम के हिसाब से फिक्स्ड या प्रतिशत आधारित वैल्यू लगती है। अब ई-स्टांपिंग से काम आसान हो गया है, जहां ऑनलाइन सही अमाउंट जेनरेट हो जाता है। हमेशा वकील या लोकल ऑफिस से सलाह लें, ताकि कोई गलती न हो। सही स्टांप पेपर न सिर्फ पैसे बचाता है, बल्कि भविष्य के झगड़ों से भी बचाता है। 

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