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Railway Facts: ट्रेन इंजन की खिड़की पर क्यों लगी होती है जाली? वजह जानकर चौंक जाएंगे, सुरक्षा से जुड़ा है राज

ट्रेन इंजन पर लगी ये जाली दिखने में मामूली लगती है, लेकिन इससे जुड़ा है ऐसा सुरक्षा राज जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। रेलवे की ये ट्रिक करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी है!

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ट्रेन इंजन की खिड़की पर जाली देखकर हर कोई सोच में पड़ जाता है कि आखिर यह क्यों लगाई जाती है। यह छोटा सा इंतजाम लोको पायलट की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। पटरी पर तेज रफ्तार से दौड़ती ट्रेनों में कई खतरे छिपे होते हैं, जिनसे यह जाली बचाव का काम करती है।

Railway Facts: ट्रेन इंजन की खिड़की पर क्यों लगी होती है जाली? वजह जानकर चौंक जाएंगे, सुरक्षा से जुड़ा है राज

जाली लगाने की असली वजह

तेज स्पीड वाली ट्रेनें जैसे शताब्दी या राजधानी 130 से 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पकड़ लेती हैं। इस दौरान पटरी से उछलते कंकड़-पत्थर या छोटी टहनियां इंजन के शीशे से जोरदार धक्का मार सकती हैं। जाली इन वस्तुओं को रोक लेती है, जिससे शीशा सुरक्षित रहता है और ड्राइवर को चोट नहीं लगती।

यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा

स्टेशन पर रुकते समय कई बार यात्री उत्साह में इंजन की खिड़की से सिर या हाथ बाहर निकाल लेते हैं। जाली इस जोखिम को पूरी तरह खत्म कर देती है और दुर्घटना की गुंजाइश नहीं छोड़ती। पुराने इंजनों में यह मजबूत स्टील की बनी होती है, जो लंबे समय तक टिकाऊ रहती है।

नई ट्रेनों में नया तरीका

वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में जाली की जगह बुलेटप्रूफ ग्लास फिट किया जाता है। यह शीशा खुद ही इतना मजबूत होता है कि पत्थरों का असर नहीं पड़ता। रेलवे हर कदम पर सुरक्षा को मजबूत बनाने में जुटा रहता है।

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