Join Youtube

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का आदेश,कमाने वाली पत्नी गुजारा भत्ता की हकदार नहीं!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी खुद नौकरी करती है और पर्याप्त वेतन कमा रही है, तो वह पति से गुज़ारा भत्ता नहीं मांग सकती। यह फैसला आत्मनिर्भर महिलाओं के लिए कानून के दायरे को स्पष्ट करता है।

Published On:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी स्वयं अच्छी आमदनी कर रही है और आत्मनिर्भर है, तो वह अपने पति से सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण (गुज़ारा भत्ता) की हकदार नहीं होगी। अदालत ने कहा कि यह कानून केवल उन महिलाओं की सहायता के लिए है जो आर्थिक रूप से निर्भर हैं और अपना गुज़ारा खुद नहीं कर सकतीं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का आदेश,कमाने वाली पत्नी गुजारा भत्ता की हकदार नहीं!

न्यायालय ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का आदेश

यह फैसला उस याचिका पर आया जिसमें पति ने परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पति को पत्नी को हर महीने पाँच हज़ार रुपये देने का निर्देश दिया था, जबकि पत्नी पहले से ही लगभग 36 हज़ार रुपये प्रति माह कमा रही थी।

न्यायालय ने आदेश को रद्द करते हुए कहा कि जब पत्नी खुद पर्याप्त वेतन प्राप्त करती है, तब “संतुलन बनाए रखने” के नाम पर उसे कोई अतिरिक्त राशि देना उचित नहीं है।

पत्नी ने खुद को बेरोजगार बताया, पर रिकॉर्ड बोले कुछ और

अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि पत्नी ने सुनवाई के दौरान खुद को बेरोजगार और कम शिक्षित बताया था। लेकिन जांच में सिद्ध हुआ कि वह उच्च शिक्षित है — पोस्ट ग्रेजुएट है और निजी कंपनी में बतौर सीनियर सेल्स कोऑर्डिनेटर काम कर रही है। अदालत ने माना कि विवाहित महिला ने अपनी वास्तविक स्थिति को छिपाकर न्याय पाने की कोशिश की, जो न्याय के प्रति ईमानदार दृष्टिकोण नहीं है।

यह भी पढ़ें- SC-ST वाले मुकदमे पर बड़ा निर्णय! फर्जी केस दर्ज कराने वालों को अब होगी 5 साल की सजा, कोर्ट ने कहा: सख्ती जरूरी

पति पर भी हैं पारिवारिक जिम्मेदारियां

अदालत ने टिप्पणी की कि पति पर वृद्ध माता-पिता की देखभाल और अन्य सामाजिक जिम्मेदारियों का बोझ पहले से है। ऐसे में जब पत्नी पर कोई अतिरिक्त भार नहीं है, तो उसकी 36 हज़ार रुपये मासिक आय को पर्याप्त माना जा सकता है।

पति से आर्थिक सहायता की पात्र नहीं

अपने निर्णय में अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 (1)(ए) के अंतर्गत वही महिला गुज़ारा भत्ते की हकदार है जो अपना जीवन स्वतंत्र रूप से चलाने में असमर्थ हो। इस मामले में पत्नी आत्मनिर्भर है और पर्याप्त वेतन प्राप्त कर रही है, इसलिए उसे भरण-पोषण की आवश्यकता नहीं है।

न्यायालय का संदेश

इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय तब ही हस्तक्षेप करेगा जब महिला वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हो। अगर कोई पत्नी अपने पेशे या आय को छिपाकर गुज़ारा भत्ता पाने की कोशिश करती है, तो वह इस कानून की मंशा के विपरीत होगा।

Leave a Comment

अन्य संबंधित खबरें

🔥 वायरल विडिओ देखें